भावांतर योजना 2025: इन 7 जिलों के किसानों ने कराया सबसे अधिक पंजीयन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास पर 21 अक्टूबर 2025 को हुई बैठक में भावांतर भुगतान योजना (Bhavantar Yojana 2025) की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष योजना में अब तक 9.36 लाख किसानों ने पंजीयन करवाया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में तीन गुना अधिक है।

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राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना किसानों को सोयाबीन जैसी फसलों के मूल्य अंतर (MSP व मंडी दर के बीच का अंतर) का भुगतान करने के लिए लागू की गई है, ताकि उन्हें किसी तरह की आर्थिक हानि न हो।

इन 7 जिलों में हुआ सबसे अधिक पंजीयन

भावांतर योजना के तहत इस बार उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा और सागर जिले ऐसे हैं जहां 50-50 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है।
इसके अलावा 21 जिलों में 10-10 हजार से अधिक किसानों ने भी पंजीयन कराया है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया किसानों के लिए आसान और पारदर्शी रखी जाए ताकि किसी को कोई असुविधा न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों और उपमंडियों में आवश्यक तैयारियाँ समय रहते पूरी कर ली जाएं।

किसानों को भुगतान के संबंध में भेजा जाएगा SMS

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को भावांतर राशि का भुगतान डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा।
इसके साथ ही भुगतान की जानकारी किसानों को SMS के माध्यम से भेजी जाएगी, ताकि उन्हें समय पर सूचना मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को सोयाबीन विक्रय के लिए मंडियों में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएं।

ई-उपार्जन पोर्टल से होगा भुगतान

योजना के तहत सभी किसानों का डेटा ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत है।
इस पोर्टल के माध्यम से किसानों के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाएगी।
प्रदेश में इस योजना के सुचारू संचालन के लिए सभी जिलों में तकनीकी और मानव संसाधनों की व्यवस्था की गई है।

राज्य सरकार के अनुसार, इस वर्ष किसानों में बढ़ती जागरूकता और प्रचार-प्रसार के कारण पंजीयन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

24 अक्टूबर से शुरू होगी सोयाबीन विक्रय अवधि

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सोयाबीन विक्रय अवधि 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है।
इस दौरान किसान अपनी फसल को निर्धारित मंडियों या उपमंडियों में विक्रय कर सकेंगे।
मंडी पोर्टल पर संपूर्ण प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की जाएगी।

प्रत्येक मंडी में किसानों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क स्थापित की गई है।
साथ ही मंडी परिसर में सीसीटीवी मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

कलेक्टर और कमिश्नर को दिए गए निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर और कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि किसानों को योजना से जुड़ी समस्त जानकारी समय पर मिले।
राज्य स्तर पर कृषि सचिव भी लगातार निगरानी और समीक्षा कर रहे हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई देरी न हो।

उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से किसानों को समय पर लाभ मिले, यह सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भावांतर योजना 2025 क्यों महत्वपूर्ण है

  • सोयाबीन जैसे फसलों की मंडी दर MSP से नीचे जाने पर किसानों को नुकसान होता है।
  • योजना के तहत किसानों को MSP और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई मिलती है।
  • इससे किसानों की आय में स्थिरता और सुरक्षा बनी रहती है।
  • DBT के माध्यम से भुगतान होने से पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  • किसानों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ता है और वे मंडियों में अधिक सक्रियता से विक्रय करते हैं।

निष्कर्ष

भावांतर योजना 2025 ने मध्य प्रदेश के किसानों को राहत और सुरक्षा दोनों दी है।
राज्य के सात जिलों में सबसे ज्यादा पंजीयन यह दर्शाता है कि किसान इस योजना को लेकर काफी उत्साहित हैं।
अब सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि प्रत्येक किसान को समय पर डीबीटी भुगतान मिले और मंडियों में विक्रय प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के संपन्न हो।

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