धनतेरस के दिन किसानों को मिली राहत
धनतेरस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया। सीहोर जिले के 2 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹118 करोड़ की मुआवजा राशि ट्रांसफर की गई। यह राशि सोयाबीन फसल क्षति और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत के रूप में दी गई है।
कुल 10 तहसीलों के किसानों को मिला लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि सीहोर जिले की 10 तहसीलों के किसानों को यह राशि दी गई है। इनमें शामिल हैं —
आष्टा, जावर, रेटी, इछावर, श्यामपुर, दोराहा, सिहोर ग्रामीण, और सिहोर नगर।
इनमें से आठ तहसीलों के किसानों को येलो मोजेक वायरस और कीट व्याधि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ₹101 करोड़ 70 लाख दिए गए हैं, जबकि दो तहसीलों में अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को ₹16 करोड़ 70 लाख की राहत राशि प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री का संबोधन और वादा
सीहोर जिले के बिलकिसगंज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा —
“मैं आज 26,000 किसानों के खातों में ₹118 करोड़ की राशि डाल रहा हूं। हमारे किसान मेहनती हैं, और सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है। सिहोर का गेहूं दुनिया जानती है, और अब सोयाबीन में भी हम हर साल ₹1000 का भाव बढ़ा रहे हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही किसानों को सोयाबीन फसल बीमा की दूसरी किस्त, जिसकी राशि करीब ₹8000 करोड़ है, दी जाएगी।
अन्य जिलों के किसानों को भी लाभ
सीहोर के अलावा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजगढ़, शाजापुर, रतलाम, नर्मदापुरम और विदिशा जिलों के किसानों को भी मुआवजा राशि का वितरण किया।
इनमें से राजगढ़ जिले के किसानों को सबसे अधिक ₹277 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई है।
विकास कार्यों का लोकार्पण
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने केवल मुआवजा राशि का वितरण ही नहीं किया, बल्कि ₹69 करोड़ 38 लाख की लागत से विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण भी किया।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- ₹118 करोड़ सीहोर जिले के किसानों को राहत के रूप में दिए गए
- 10 तहसीलों के किसानों को हुआ लाभ
- 2 लाख से अधिक किसानों को मुआवजा राशि ट्रांसफर
- येलो मोजेक वायरस, कीट व्याधि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसान लाभान्वित
- राजगढ़ जिले को मिला सबसे अधिक ₹277 करोड़
- ₹8000 करोड़ की फसल बीमा किस्त जल्द जारी होगी
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस पहल से प्रदेश के किसानों में नई उम्मीद जगी है। सोयाबीन जैसी प्रमुख फसल के नुकसान की भरपाई और भविष्य के लिए बीमा सहायता दोनों कदम किसानों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।


