मुख्यमंत्री निवास से सुबह 11 बजे सीएम मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा किसानों को आर्थिक सहायता पहुंचाएंगे।
मध्यप्रदेश का किसान इस बार मानसून 2025 के दौरान भारी संकट से गुज़रा है। लगातार अतिवृष्टि, प्राकृतिक आपदाएँ, और कीट व्याधियाँ जैसे पीला मोजैक वायरस ने राज्य के कई जिलों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में लहलहाती फसलें बारिश और बीमारियों की मार से झुक गईं, जिससे लाखों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई। ऐसे हालात में सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए किसानों को तत्काल राहत पहुँचाने की योजना बनाई है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसानों को राहत राशि वितरण की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और डिजिटल तरीके से होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद किसानों से जुड़ेंगे और राहत राशि का सिंगल क्लिक वितरण करेंगे।
राहत वितरण की घोषणा
राज्य शासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, 3 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11 बजे मुख्यमंत्री निवास से मुख्यमंत्री मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के प्रभावित किसानों को राहत राशि वितरित करेंगे। यह वितरण पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित होगा, यानी एक ही क्लिक पर किसानों के खातों में सीधे राहत राशि जमा होगी।
इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बनाते हुए, मुख्यमंत्री प्रभावित किसानों से सीधा संवाद भी करेंगे। किसान अपनी समस्याएँ और अनुभव सीधे मुख्यमंत्री के सामने रख पाएँगे, जिससे शासन को ज़मीनी हालात का प्रत्यक्ष आकलन करने में मदद मिलेगी।

किसानों के लिए उम्मीद की किरण
बीते कुछ वर्षों में किसानों ने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगातार कठिनाइयाँ झेली हैं। कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश, तो कभी कीटों का प्रकोप—इन सबने कृषि को अस्थिर बना दिया है। 2025 का मानसून भी किसानों के लिए चुनौती लेकर आया।
- अतिवृष्टि से फसलों का जलभराव हुआ और धान, सोयाबीन जैसी मुख्य फसलें खराब हो गईं।
- पीला मोजैक वायरस ने कपास की खेती को प्रभावित किया।
- कई स्थानों पर कीट व्याधियों ने उत्पादन घटा दिया।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए, मुख्यमंत्री का यह कदम किसानों के लिए नई उम्मीद की तरह है। राहत राशि मिलने से किसान कर्ज़ का बोझ हल्का कर सकेंगे और अगली फसल की तैयारी कर पाएँगे।
प्रशासनिक तैयारी
मुख्यमंत्री के इस डिजिटल वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं—
- प्रभावित किसानों की पहचान कर उनके प्रकरण शीघ्र स्वीकृत किए जाएँ।
- स्वीकृत प्रकरणों की राहत राशि का आकलन कर बिल तैयार कर ट्रेजरी में प्रस्तुत किया जाए।
- किसानों की सूची और भुगतान योग्य राशि की पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
- जिन किसानों से मुख्यमंत्री संवाद करेंगे, उनका विवरण अनिवार्य रूप से भेजा जाए।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल होने वाले मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की जानकारी भी साझा की जाए।
डिजिटल माध्यम से पारदर्शिता
पारंपरिक व्यवस्था में राहत राशि वितरण की प्रक्रिया लंबी और जटिल हुआ करती थी। कई बार किसानों को महीनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से पूरी प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी हो गई है।
सिंगल क्लिक वितरण का अर्थ है कि राज्य स्तर पर राशि स्वीकृत होने के बाद सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भ्रष्टाचार की संभावना भी घटेगी।
किसानों से सीधा संवाद
इस कार्यक्रम की एक और खासियत यह है कि मुख्यमंत्री स्वयं किसानों से संवाद करेंगे। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसमें किसान अपनी समस्याओं और ज़मीनी चुनौतियों को सीधे शासन तक पहुँचा सकेंगे। इससे न केवल राहत राशि वितरण का भरोसा बढ़ेगा बल्कि सरकार को भविष्य की नीतियाँ बनाने में भी दिशा मिलेगी।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में मानसून 2025 की आपदाओं ने किसानों को गहरी चोट दी है, लेकिन राज्य सरकार का यह प्रयास उनके लिए एक मजबूत सहारा साबित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा सिंगल क्लिक से राहत राशि वितरण न केवल समय की बचत करेगा बल्कि किसानों को यह भरोसा भी दिलाएगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
यह कदम किसानों की आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी पारदर्शिता और शासन की जवाबदेही का मजबूत उदाहरण है। आने वाले समय में यदि इस मॉडल को और सुदृढ़ किया गया तो यह पूरे देश में कृषि राहत वितरण का आदर्श बन सकता है।


