Crop Advisory 2025 | मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में इस समय रबी फसलों (Rabi Crops) की बुवाई तेजी से चल रही है। गेहूं की अधिक उपज (High Wheat Yield) के लिए किसान भाई अब भी केवल यूरिया (Urea) और डीएपी (DAP) पर निर्भर हैं।
लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है —
👉 “सिर्फ दो नहीं, खेत को चाहिए 18 पोषक तत्व (18 Essential Nutrients for Wheat Crop), तभी फसल भरपूर होगी और मिट्टी की सेहत भी बनी रहेगी।”
खेत को चाहिए 18 पोषक तत्व | 18 Nutrients for Wheat Crop
वैज्ञानिक दृष्टि से पौधों के जीवन-चक्र के लिए 18 आवश्यक तत्व जरूरी हैं।
इनमें से तीन (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन) तो हवा और पानी से मिलते हैं, बाकी 15 तत्व मिट्टी या फोलीयर स्प्रे (Foliar Spray) से देना जरूरी है।
प्रमुख पोषक तत्व (Macronutrients)
नाइट्रोजन (Nitrogen – N) – पत्तियों की वृद्धि और हरियाली के लिए
फॉस्फोरस (Phosphorus – P) – मजबूत जड़ें और बेहतर अंकुरण
पोटैशियम (Potassium – K) – रोग-प्रतिरोधक क्षमता व दाने का विकास
गौण पोषक तत्व (Secondary Nutrients)
कैल्शियम (Calcium – Ca) – नई कलियों और फलों की गुणवत्ता
मैग्नीशियम (Magnesium – Mg) – क्लोरोफिल और प्रकाश संश्लेषण
सल्फर (Sulphur – S) – प्रोटीन निर्माण व दाने की गुणवत्ता
सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)
जिंक (Zinc – Zn) – पौधे की एंजाइम गतिविधि
बोरोन (Boron – B) – फूल व फल विकास
कॉपर (Copper – Cu)
आयरन (Iron – Fe)
मैंगनीज (Manganese – Mn)
मोलीब्डेनम (Molybdenum – Mo)
कोबाल्ट (Cobalt – Co)
क्लोरीन (Chlorine – Cl)
निकेल (Nickel – Ni)
👉 इन सबका सही अनुपात फसल की उपज (Yield) में 20-25% तक बढ़ोतरी करता है।
मिट्टी परीक्षण और “4R Principle” का महत्व
(Soil Testing for Wheat | 4R Nutrient Management)
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) के लिए किसानों को “चार आर सिद्धांत (4R Principle)” अपनाना चाहिए:
Right Source (सही स्रोत): मिट्टी की स्थिति के अनुसार पोषक तत्व चुनें।
Right Rate (सही मात्रा): जरूरत के अनुसार सटीक मात्रा दें।
Right Time (सही समय): बुवाई, कल्ले बनने व फूल आने के समय पोषण दें।
Right Place (सही स्थान): जड़ के पास या गहराई में खाद डालें ताकि नुकसान न हो।
🔸 इससे फसल की उत्पादकता 25% तक बढ़ती है और उर्वरक की लागत 20–30% तक घट जाती है।
संतुलित पोषण के फायदे | Benefits of Balanced Fertilization
(Wheat Crop Advisory 2025 | Increase Wheat Yield)
✅ उत्पादन में 20-25% तक वृद्धि
✅ मिट्टी का जैविक कार्बन (Soil Organic Carbon) 0.5% तक बढ़ता है
✅ नमी धारण क्षमता और जल उपयोग दक्षता में सुधार
✅ पौधे रोग व सूखे दोनों सहन कर पाते हैं
✅ कम लागत में ज्यादा उपज — High Return on Low Input
सिर्फ यूरिया-डीएपी डालने के नुकसान
(Overuse of Urea and DAP Effects on Soil)
❌ मिट्टी का जैविक कार्बन घटता है
❌ सूक्ष्म जीव (Microorganisms) मर जाते हैं
❌ मिट्टी की उर्वरता लगातार घटती है
❌ लंबे समय में फसल कमजोर और रोगग्रस्त हो जाती है
समाधान:
देसी खाद (Cow dung compost), वर्मी कम्पोस्ट और जैविक उर्वरक (Biofertilizer) का प्रयोग करें ताकि मिट्टी की संरचना और जीवन दोनों टिके रहें।
पोषक तत्वों की कमी के लक्षण (Wheat Nutrient Deficiency Symptoms)
(Nutrient Deficiency Chart for Wheat in Hindi)
| तत्व | कमी के लक्षण | प्रभाव |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन | पुरानी पत्तियों में पीलापन | वृद्धि रुकना |
| फॉस्फोरस | पत्तियाँ बैंगनी या गहरी | जड़ें कमजोर |
| पोटैशियम | नई पत्तियों के किनारे सूखना | रोग प्रतिरोध घटे |
| कैल्शियम | नई कलियों में विकृति | फल का सिरा सड़ना |
| जिंक | पत्तियों में पीली धारियाँ | उपज में कमी |
किसानों के लिए सलाह | Wheat Crop Advisory 2025
- मिट्टी परीक्षण हर दो साल में कराएं
- NPK के साथ Zinc + Sulphur + Boron जरूर दें
- Organic manure + Chemical fertilizer का संतुलन रखें
- Foliar spray से सूक्ष्म तत्वों की कमी दूर करें
- सिंचाई व पोषण प्रबंधन पर बराबर ध्यान दें


