मध्य प्रदेश में शुरू हुई भावांतर योजना: किसानों के लिए जरूरी दस्तावेज़, नियम और भुगतान प्रक्रिया की पूरी जानकारी
24 अक्टूबर से मध्य प्रदेश की सभी मंडियों में भावांतर योजना लागू हो गई है। इस योजना के तहत किसान अपनी सोयाबीन की फसल मंडियों में बेच सकते हैं और उन्हें मूल्य अंतर की राशि सरकार द्वारा बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ पाने के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता है, कौन से नियम लागू किए गए हैं और किसानों को भुगतान कब मिलेगा।
भावांतर योजना क्या है?
भावांतर योजना (भवंतर भुगतान योजना) का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है। यदि मंडी में फसल बाजार भाव से कम दाम पर बिकती है, तो सरकार अंतर राशि सीधे किसानों के खाते में जमा करती है।
किसानों के लिए आवश्यक दस्तावेज़
भावांतर योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को मंडी जाते समय ये दस्तावेज साथ रखने जरूरी हैं:
- भावांतर योजना पंजीयन की फोटोकॉपी
- आधार कार्ड की फोटोकॉपी
- बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
- वाहन का पंजीकरण नंबर (या आरसी की कॉपी)
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर (ओटीपी वेरिफिकेशन हेतु)
इन दस्तावेजों के बिना किसान प्रवेश पर्ची नहीं बनवा पाएंगे, जिससे योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।
मंडी प्रवेश प्रक्रिया
किसान जब मंडी पहुंचेंगे तो गेट पर ही प्रवेश पर्ची (Entry Slip) जनरेट की जाएगी। यह पर्ची आधार कार्ड, पंजीयन नंबर और वाहन नंबर के आधार पर बनेगी। केवल प्रवेश पर्ची वाले किसान ही भांतर योजना के तहत नीलामी में भाग ले सकेंगे।
भुगतान की प्रक्रिया
मंडी में फसल बिकने के बाद व्यापारी किसानों को नकद भुगतान नहीं कर पाएंगे।
सभी भुगतान RTGS के माध्यम से बैंक खाते में किए जाएंगे।
इसके 15 दिन बाद सरकार द्वारा मॉडल रेट के अनुसार अंतर राशि (भावांतर भुगतान) किसानों के खाते में भेजी जाएगी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान की फसल ₹4000 प्रति क्विंटल पर बिकी है और मॉडल रेट ₹5328 तय हुआ है, तो ₹1328 का अंतर सरकार जमा करेगी।
भुगतान की समयसीमा
- व्यापारी द्वारा भुगतान: 1–2 दिन के भीतर (RTGS से)
- सरकार द्वारा भांतर राशि: 15 दिन बाद (लगभग 7 नवंबर तक)
यदि सर्वर या बैंक की छुट्टी के कारण देरी होती है, तो किसानों को कुछ और दिन इंतजार करना पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण नियम
- फार्म गेट बिक्री या शोधा पत्रक से बिक्री करने वाले किसान योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।
- खरीदी के अगले दिन मंडी में भुगतान सूची प्रदर्शित की जाएगी।
- यदि व्यापारी ने पैसा नहीं डाला, तो मंडी प्रशासन कार्रवाई करेगा।
- किसानों को सलाह दी गई है कि साफ-सुथरी और उच्च गुणवत्ता (FAQ) वाली फसल ही मंडी में लाएं, ताकि बेहतर दाम मिल सके।
भावांतर योजना से जुड़ी सावधानियाँ
पिछले वर्षों में कुछ व्यापारियों द्वारा भुगतान न करने के मामले सामने आए थे। इसलिए इस बार मंडी प्रशासन और सरकार दोनों की जिम्मेदारी तय की गई है कि हर किसान को समय पर भुगतान मिले।
निष्कर्ष
भांतर योजना किसानों के हित में एक सराहनीय कदम है, जो बाजार में मूल्य असमानता को कम करती है। सही दस्तावेज़, साफ फसल और नियमों के पालन से किसान इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं।


